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दोबारा फडणवीस सरकार बनवाने में भूपेंद्र यादव ने खेली महत्वपूर्ण भूमिका, जानें पूरी कहानी

पिछले कुछ दिनों में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और राकांपा के अजित पवार के बीच कई बैठकें हुईं। इसके लिए, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपने सबसे भरोसेमंद लेफ्टिनेंट, भूपेन्द्र यादव, जो पार्टी महासचिव और महाराष्ट्र में चुनाव प्रभारी हैं, को जिम्मेदारी दी गयी थी। जब एनसीपी प्रमुख शरद पवार, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और कांग्रेस नेताओं के बीच बंद कमरों में बातचीत हो रही थी, और उनके द्वारा मीडिया के सामने लगातार खुलासे किए जा रहे थे, भाजपा ने अपने कार्डों को अपने सीने के करीब रखा।

जैसा कि तीनों ने घोषणा की कि उनकी बातचीत शुक्रवार दोपहर एक निष्कर्ष के करीब थी, शाह ने यादव को बातचीत के अंतिम दौर के लिए मुंबई भेज दिया। पार्टी सूत्रों ने कहा कि यादव शुक्रवार शाम 7 बजे मुंबई पहुंचे और देवेंद्र फड़नवीस के साथ अंतिम बातचीत पर काम किया। वास्तव में, पार्टी के प्रत्येक वरिष्ठ नेता ने शुक्रवार शाम तक कहा था कि महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार बनाने की संभावना “100 प्रतिशत” है।

हालांकि, भाजपा नेतृत्व ने पिछले हफ्ते तक शिवसेना के साथ अपने विकल्प खुले रखे थे, लेकिन गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी द्वारा सरकार बनाने के लिए बुलाये जाने पर असमर्थता जताने के बाद उन्होंने वैकल्पिक योजनाओं के लिए प्रयास करना शुरू कर दिया। बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक के बाद शाह ने यादव को मुंबई भेजने के लिए बुला लिया।

बाद में, भाजपा नेतृत्व ने अगले पंद्रह दिनों तक कांग्रेस-राकांपा और शिवसेना के बीच की घटनाओं पर नज़र रखी। सूत्रों ने बताया कि भाजपा ने तय कर लिया था कि वह ’मातोश्री’ या ’सेना प्रमुख’ को अपनी शर्तों को उनपर थोपने नहीं देगी। एनडीए के पाले में वापस लौटने के लिए भाजपा नेतृत्व शिवसेना को एक भी दिन के लिए मुख्यमंत्री पद नहीं देना चाह रही थी जबकि सेना ने कम से कम 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री पद पर जोर दिया था।

भाजपा नेतृत्व को शुरू मे विश्वास था कि या तो शिवसेना वापस आ जाएगी या एक वैचारिक यू-टर्न से बचने के लिए कांग्रेस सरकार बनाने की प्रक्रिया से हट जाएगी। हालांकि, एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को आगे बढ़ने के लिए मनाने के लिए कार्य किया और इसके लिए सेना एनसीपी प्रमुख शरद पवार पर दबाव डालती रही।

जब शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के बीच राजनीतिक बातचीत ने एक गंभीर मोड़ ले लिया तो भाजपा नेतृत्व ने भी अपना रुख बदल लिया। शाह और कार्यवाहक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अजीत पवार के संपर्क में थे, जिन्हें विधिवत रूप से राकांपा का विधायक दल नेता चुना गया था।

शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन के लिए शुक्रवार को होने वाली अंतिम दौर की बातचीत के बाद भाजपा ने इंतजार करना बंद कर दिया कि गठबंधन अपने आप ही ध्वस्त हो जाएगा। शाह ने शुक्रवार देर रात एक बार फिर भूपेंद्र यादव को मुंबई के लिए रवाना किया। हालांकि शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन के नेताओं ने शुक्रवार देर शाम को फिर से बैठक करने के लिए सहमति व्यक्त की और उनकी “सकारात्मक” बैठक के बाद, भाजपा ने स्थिति को अपने हाथों से बाहर जाने से पहले अपने प्लान को स्वरुप देना आरम्भ किया। राष्ट्रपति शासन को सुबह-सुबह निरस्त कर दिया गया जिसके बाद फडणवीस और पवार को शनिवार सुबह-सुबह राजभवन में एक सादे समारोह में सीएम और डिप्टी सीएम के रूप में शपथ दिलाई गई, जिससे कांग्रेस नेतृत्व  और “मातोश्री” स्तब्ध और अपमानित रह गया।

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