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क्या इस बार आएगा राम मंदिर पर फैसला?

क्या इस बार निकलेगा नतीजा?

अंतत: एक बार फिर से सुनवाई की बात हुई और अयोध्या मामले में रोज़ सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने छह अगस्त से रोज़ सुनवाई की तारिख दे दी है। यह बहुत ही दुखद है कि हिन्दुओं को बार बार मंदिर के लिए आस ताकनी पड़ रही है! मगर जैसे एक डायलॉग है कि तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख! मगर यह भगवान पर भी लागू होगा, यह नहीं पता था।

 न जाने कब से भगवान त्रिपाल में बैठे हुए हैं और न जाने कब तक रहेंगे! 1992 में मस्जिद तोड़े जाने से लेकर अब तक न जाने कितना पानी सरयू में बह चुका है, मगर नतीजा नहीं आ पाया है। सरकार पर सरकार बदलती जा रही हैं, अधिकारी पे अधिकारी बदले जा रहे हैं, मगर नतीजा है कि नहीं आ पा रहा है। मजे की बात है कि अदालत के पास सभी मामलों को देखने का समय है मगर राम मंदिर को नहीं ! आखिर ऐसा क्यों हो रहा है इसका जबाव किसी के पास नहीं ही!

  इस मामले का आपसी सहमति से हल निकालने की हर संभावना ख़त्म हो चुकी है और आज ही इस विफलता के बाद अदालत ने छ अगस्त से रोज़ सुनवाई की तारीख दे दी है।

ज्ञात हो कि इलाहबाद हाईकोर्ट ने 2010 में राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। इसमें एक हिस्सा भगवान रामलला विराजमान, दूसरा निर्मोही अखाड़ा व तीसरा हिस्सा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को देने का आदेश था। इस फैसले को भगवान रामलाल विराजमान सहित हिंदू, मुस्लिम सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

न जाने कितने लोगों ने राम मंदिर के लिए अपनी जान दी है और गोधरा काण्ड में मारे गए लोग भी भगवान राम की पूजा करने ही गए थे। न जाने कितने कारसेवकों के जले हुए शरीर राम मंदिर की आस में हैं। न जाने कितने कारसेवकों पर मुस्लिमों का भरोसा पाने के लिए गोली चलवा दी थी! सच न जाने करोड़ों  लोगों की आस कब पूरी होगी!

उच्चतम न्यायालय के रोज़ सुनवाई के फैसले से क्या हम यह समझ सकते हैं कि राम मंदिर का फैसला शीघ्र होगा

 उम्मीद कर सकते हैं कि राम अब तम्बू से बाहर आएँगे।

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