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पाकिस्तान में मनुस्मृति से इतनी नफरत क्यों?

पाकिस्तान सेना का विज्ञापन आजकल सुर्ख़ियों में है। वैसे तो पाकिस्तान कई कारणों से सुर्ख़ियों में है, मगर इस बार कुछ अलग तरीके से यह सुर्ख़ियों में हैं। सुर्ख़ियों में है सेना का वह विज्ञापन जिसमें कई प्रकार के पदों के लिए आवेदन निकले हैं। इनमें कई आवेदन ड्राइवर, सिपाई, व्यापारियों और सफाई कर्मी के लिए हैं। बाकी किसी भी श्रेणी में किसी भी प्रकार का कोई आरक्षण नहीं बस सफाई कर्मियों के लिए केवल ईसाइयों की शर्त रखी है।

वैसे तो कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता मगर किसी धर्म को केवल नालों की सफाई तक सीमित कर दिया जाए, इससे अपमानजनक कुछ नहीं होता। क्या पाकिस्तान में ईसाई केवल इस काम के लिए ही हैं। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के लिए काम करने वाले कपिल देव ने इस संबंध में प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि मैं यह समझने में नाकाम हूँ कि सफाई के सारे कार्य केवल ईसाइयों के लिए ही क्यों होते हैं? अगर पश्चिम में अमेरिका, यूके या कहीं भी सफाई का कार्य केवल मुस्लिमों को ही दिया जाए तो? आप गंदगी करें और हम साफ़ करें! बस बहुत हुआ अब यह बंद होना चाहिए! #EqualityForAll के साथ कपिलदेव ने इस मेसेज पाकिस्तानी सेना के विज्ञापन के संग ट्वीट किया।

यह पूरा मामला ही शर्मनाक है, क्योंकि व्यक्ति हिन्दू से ईसाई तभी बनता है जब उसे यह यकीन हो कि वह इस प्रकार का गंदा कार्य नहीं करेगा। भारत में ईसाई मशीनरी धड़ल्ले से इसी का लालच देकर उनका धर्म परिवर्तन कराती हैं। मगर यह बहुत ही आम हो गया है कि वह धर्म तो बदल देते हैं, मगर इस गंदे कार्य से छुटकारा नहीं मिलता।

पाकिस्तान में यह आम है, इससे पहले भी कई बार यह मामला उठा है, मगर इस बार यह मामला ट्विटर पर छाया हुआ है। कई पाकिस्तानी अल्पसंख्यक कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तानी सेना के इस नियम की आलोचना की है और सफाई के लिए केवल ईसाइयों को ही नियुक्त किया जाएगा, इस भेदभाव वाली घटना को रोकने की सिफारिश की है।

नेशनल लोबीइंग डेलिगेशन फॉर माइनोरिटी राइट्स, के सदस्य आसिफ अकील ने सेना की इस नीति का विरोध करते हुए मनुस्मृति को भी साथ लपेट लिया है। हालांकि जब व्यक्ति हिन्दू से ईसाई हो गया तब मनुस्मृति की परिधि से बाहर हो गया, क्योंकि मनुस्मृति केवल हिन्दुओं का ही ग्रन्थ है। मगर फिर भी मनुस्मृति को इस पूरे विवाद में घसीटने का अर्थ समझ नहीं आया। आसिफ अकील लिखते हैं I hope you already know this comes from Manusmriti। Most of the  Christians come from an untouchable caste that is why they are forced  into cleaning shit। Please reject this philosophy of hatred in clear  terms। इसमें जब वह लिखते हैं कि अधिकतर ईसाई अछूत मानी जाने वाली जातियों से आते हैं, जो केवल सफाई का ही काम करती हैं। इसलिए कृपया इस नफरत को साफ़ रूप से खारिज करें!

मनुस्मृति से इस हद तक नफरत नहीं समझ आ रही, जब आपने धर्म बदल लिया तो आप मनुस्मृति के दायरे में कैसे आए? बाइबिल या कुरआन का संचालन तो मनुस्मृति से नहीं होता न! यदि वह ऐसी जातियों से आए हैं, तो ईसाइयों में उन्हें वह जाति नहीं मिली जिससे वह ऊपर उठ जाते?

इस तरह की दोगली बातें वह लोग खुलकर करते हैं, जो धर्म के आधार पर भेदभाव खुले आम करते हैं।

पाकिस्तान की यह नफरत की नीति एक बार फिर विफल होगी।

डॉ. सोनाली मिश्रा

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