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क्या ज़ोमैटो के मालिक ने किया हिन्दू धर्म का अपमान?

धर्म को लेकर दोहरा रवैया नहीं चलेगा!

कल से ज़ोमैटो ख़बरों में है, मगर यह खबर थोड़ी विचलित करने वाली है! हम लोगों ने अधिकतर हलाल मीट के मामले सुने हैं! और यह भी पता है कि यह शब्द किस समुदाय से जुड़ा है और हमें यह भी पता है कि सूअर का मांस कौन सा समुदाय नहीं खाता है! धर्म या रीतिरिवाज़ ही खानपान को प्रभावित करते हैं यह सच है!

  कल एक लड़के ने सावन के महीने में अपनी शुद्धता को ध्यान में रखते हुए ज़ोमैटो से हिन्दू डिलीवरी बॉय के द्वारा खाना मंगवाने के लिए कहा! मगर इसके बदले में ज़ोमैटो के मालिक ने न केवल यह अनुरोध ठुकरा दिया बल्कि यह भी कहा कि उसे फिकर नहीं है कि उसके हाथ से कितना व्यापार जाता है और यह भी कि खाना धर्म से प्रभावित नहीं होता, बल्कि खाना ही खुद एक धर्म है! कहने को यह आदर्श लगता है मगर यह कितना आदर्श है इसका पता ज़ोमैटो के उस ट्वीट से पता चल जाता है जब एक ग्राहक ने उससे वह मांसाहारी खाना लेने से इनकार कर दिया था जिसमें हलाल मांस का इस्तेमाल नहीं हुआ था! ज़ोमैटो ने  उस मामले में अपनी गलती मानते हुए उस ग्राहक को हलाल मीट दिया था!

 अब ज़ोमैटो को यह बताना होगा कि अगर हलाल मांस धर्म आधारित खानपान नहीं है तो क्या है? क्या कोई हिन्दू ग्राहक यह कहता है कि वह केवल इसके हाथ का बना खाएगा या नहीं! नहीं, ग्राहाक ने केवल इतना बोला कि उसे केवल गैर मुस्लिम डिलीवरी बॉय से खाना डिलीवर करा दे! अब इसमें ज़ोमैटो ने यह कैसे कहा कि खाने का धर्म नहीं होता, खाने का धर्म भले ही न होता तो, मज़हब जरूर होता है और वैसे भी कई ज़ोमैटो डिलीवरी बॉय खाना खाकर डिलीवर करते हुए भी देखे गए हैं, और उन पर कोई कदम भी नहीं उठाया गया है!

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