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102 डिग्री बुखार में भी कर्नाटक में काम कर रहे अमित शाह ने जीत के लिए कार्यकर्ताओं को नारेबाजी के साथ काम करने की दी नसीहत

102 डिग्री बुखार में भी कर्नाटक के दौरे पर पहुंचे अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं की क्लास लेनी शुरू कर दी है। समीक्षा बैठकों के दौरान अमित शाह यह देखकर दंग रह गए कि कार्यकर्ता न तो जनता से मिल रहे हैं और न ही बूथों पर रोस्टर के तहत रात्रि विश्राम कर रहे हैं। इतना ही नहीं, मिस्ड कॉल के माध्यम से पार्टी से जुड़ने के इच्छुक लोगों से भी वे संपर्क नहीं कर रहे हैं। एक भी टारगेट और टास्क पूरा न करने वाले कार्यकर्ताओं को शाह ने नसीहत की घुट्टी पिलाई। जमीनी स्तर पर संगठन के काम का मामला हवा-हवाई देख अमित शाह ने बुधवार (21, फरवरी) को जिलों के बूथ प्रमुखों से दो टूक कह दिया, “आप लोग कब तक भारत माता की जय के नारे के सहारे चुनाव जीतोगे? कर्नाटक में सफलता हासिल करनी है तो जनता के बीच जाना होगा, धरातल पर काम कर लोगों को लुभाना होगा।” अमित शाह ने कहा कि आलस्य छोड़कर एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा, नहीं तो कर्नाटक में बने-बनाए माहौल के बीच भी हाथ मलने को मजबूर होना पड़ेगा।

दरअसल, अमित शाह कर्नाटक के उडुपी, दक्षिण कन्नड़, शिमोगा, चिकमंगलूर और कोडगु जिले के शक्तिकेंद्र प्रमुखों की मीटिंग ले रहे थे। शक्ति केंद्र प्रमुखों के जिम्मे ही बूथ लेवल की जिम्मेदारी है। शाह ने उत्तर प्रदेश और गुजरात की तरह कर्नाटक में भी बूथ प्रमुखों की नियुक्ति की है। समीक्षा के दौरान उन्होंने पाया कि संगठन पदाधिकारियों ने टारगेट के हिसाब से निर्धारित दौरे किए ही नहीं। न ही बूथों पर कार्यकर्ताओं के बीच रात बिताकर हाल-चाल लिया। मिस्ड कॉल कैम्पेन के जरिए बीजेपी से जुड़ने के इच्छुक लोगों से भी पार्टी पदाधिकारियों ने संपर्क नहीं किया।

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एक बीजेपी नेता के मुताबिक, अमित शाह ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा, “आप लोग कैम्पेन को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। जब तक बूथ लेवल पर संगठन मजबूत नहीं होगा, पार्टी विधानसभा चुनाव कतई नहीं जीत सकती। कर्नाटक में कई रैलियों और कार्यक्रमों में शिरकत करने के दौरान यह देखकर खुशी होती है कि जनता का समर्थन पार्टी को मिल रहा है। मगर जब मैं अपने कार्यकर्ताओं से मिलता हूं तो निराशा होती है, पता चलता है कि  समय से टास्क ही नहीं पूरा हुआ।” अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र देते हुए कहा कि जब सत्ताविरोधी लहर चल रही हो, किसी पार्टी के खिलाफ एंटी इन्कम्बेंसी हो, तब चुनाव जीतना आसान होता है। जीत की नियमितता तभी हासिल होती है, जब गुजरात और मध्य प्रदेश की तरह बूथ पर पार्टी सशक्त हो। अमित शाह ने इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठन के कार्यों को हल्के में न लेने की अपील की। अमित शाह ने बूथ प्रमुखों को पांच मार्च तक सभी जगहों के दौरे और बूथों पर रात्रि विश्राम का कार्य पूरा करने का निर्देश दिया।

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