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नानावती कमीशन की रिपोर्ट गुजरात विधान सभा में पेश, नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट

गुजरात सरकार ने बुधवार को राज्य विधानसभा में नानावती आयोग की रिपोर्ट पेश की जिसने 2002 के सांप्रदायिक दंगों में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कैबिनेट सहयोगियों को क्लीन चिट दी गयी है।

नौ खंडों में 3,000 पन्नों की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राज्य में सांप्रदायिक दंगों के पीछे कोई पूर्व नियोजित साजिश नहीं थी।

हालाँकि, इस रिपोर्ट ने दो भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों आरबी श्रीकुमार और राहुल शर्मा (दोनों सेवानिवृत्त) की दंगों में भूमिका पर संदेह की उंगली उठाई गयी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सांप्रदायिक दंगों के फैलने में निलंबित आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की भी भूमिका की जांच की जानी चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार कुछ स्थानों पर पुलिस अपनी अपर्याप्त संख्या अथवा ठीक से सशस्त्र न होने के कारण भीड़ को नियंत्रित करने में अप्रभावी थी।

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जीटी नानावती (सेवानिवृत्त) और गुजरात उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अक्षय मेहता (सेवानिवृत्त) ने 2014 के दंगों पर अपनी अंतिम रिपोर्ट तत्कालीन राज्य की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को सौंपी थी।

आयोग को 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गोधरा रेलवे स्टेशन के पास साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के दो डिब्बों को जलाने के बाद हुए दंगों की जांच के लिए नियुक्त किया गया था, जिसमें 59 कारसेवकों की मौत हो गई थी। दंगों के दौरान 1,000 से अधिक लोग मारे गए थे।

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