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जमीन से जुड़े नेता ही यह कह सकते हैं!

कहते हैं जमीन से जो नेता जुड़ा होता है उसकी बात ही कुछ और होती है, जमीन से जुड़े नेताओं में सच बात कहने की हिम्मत होती है, जमीन से जुड़े नेताओं में समस्याओं का सामना और उनका हल निकालने की ताकत होती है और जमीन से जुड़े नेताओं में ही यह बात होती है कि वह तार्किक तरीके से किसी मुद्दे को उसके हल की तरफ ले जाएं। ऐसे ही एक नेता से आज परिचय कराया लोकसभा में होने वाली बहस ने! यह युवा सांसद था लद्दाख का युवा नेतृत्व जामियांग सीरिंग नाम्गयाल, जिन्होनें आज संसद को यह बताया कि जमीन से जुड़े लोग जब अपनी बात कहते हैं तो कितना मुखर होकर कहते हैं। जो लोग मोदी पर यह आरोप लगाते थे कि वह अपने समक्ष नेतृत्व उभरने नहीं देते उन्हें आज कारगिल से आने वाले युवा की ओजस्वी आवाज़ को सुनना चाहिए था।

हाल ही में कुछ युवा नेताओं ने अपने कुछ कृत्यों से निराश किया है। लगभग हर दल एक संक्रमण काल से गुजर रहा है, परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और नई पीढ़ी में सत्ता का हस्तांतरण कर रहा है। लगभग हर दल में नए नेता सामने आ रहे हैं। पारिवारिक दलों में बच्चे आगे आ रहे हैं तो वहीं कैडर आधारित दलों में भी नेतृत्व में परिवर्तन हो रहा है! हाल ही में डी राजा को भी अपने दल का नेतृत्व सौंपा गया है।

हर दल के नेता ने संसद में अपनी अपनी पार्टी के अनुसार ही बातें रख रहे हैं। हालांकि तमाम उम्मीदों के साथ आए बंगाल के कांग्रेस के सासंद अधीर रंजन ने आज निराश किया। उन्होंने धारा 370 पर कांग्रेस का पक्ष रखते हुए कुछ ऐसा कहा जिसने निराश किया। मनीष तिवारी भी अपने युवा होने के तेवर को नहीं व्यक्त कर पाए और फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे का ज़िक्र कर अपने वक्तव्य को हल्का कर दिया।

मगर जब लेह की आवाज़ बोली तो अपने राज्य पर हुए अन्याय के बारे में उस आवाज़ ने आईना दिखा दिया। जामियांग सीरिंग नाम्गयाल ने उन लोगों पर भी सवाल किए जो बार बार कश्मीरियों के साथ हुए अन्यायों की बात कर रहे थे। उन्होंने आईना दिखाते हुए पूछा कि क्या वाकई उन्हें उन अन्यायों के बारे में पता है? क्या वाकई जो लोग आज कश्मीर को लेकर रो रहे हैं, वह लेह और लद्दाख के साथ हुए अन्याय के बारे में बोले थे? क्या वह लोग जो आज कश्मीर में हुई कथित नाइंसाफी की बात कर रहे हैं, उन्होंने तब कुछ बोला था जब लेह और लद्दाख का विकास का फंड सारा कश्मीर जा रहा था?

आज उन्होंने खुलकर अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 की आड़ में लद्दाख के साथ अब तक अन्याया होता आया है। नामग्याल ने आज भाजपा सरकार द्वारा लाए गए विधेयक की तारीफ़ करते हुए कहा कि विधेयक के जरिए लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं एवं उम्मीदों का सम्मान हुआ है। धारा 370 की बात करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि पहले तो कश्मीरी पंडितों को वहां से बाहर कर दिया गया।

लद्दाख के साथ भेदभाव के बारे में और बताते हुए जामियांग सीरिंग नाम्गयाल ने कहा कि आज तक लद्दाख में कोई संस्थान नहीं है!

सच है, नेता के नेतृत्व का भान तभी होता है जब वह चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करता है!

आज भारत को एक और जमीन से जुड़ा नेता मिलने की बधाई देनी चाहिए।  

डॉ. सोनाली मिश्रा 

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