ताज़ा खबर

ताज़ा खबर
• जन्मदिन की वार्षिक भविष्यवाणी (13th July, 2018)
• आर्थिक राशिफल (13th July, 2018)
• अंकों से जानें, कैसा होगा आपका दिन (13th July, 2018)
• टैरो राशिफल (13th July, 2018)
• राशिफल (13th July, 2018)
• मोदी सरकार का फैसला, अब पर्यटन स्थलों पर खींचिए मनचाही फोटो
• पीएम मोदी ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नए मुख्यालय भवन का किया उद्घाटन
• पीएम मोदी ने नमो एप के जरिए की स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों से बातचीत, महिला सशक्तिकरण को बताया सरकार की प्रतिबद्धता
• किसानों की आमदनी दोगुना करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध- पीएम मोदी
• अमित शाह ने की झारखंड में चुनाव तैयारियों की समीक्षा
• जन्मदिन की वार्षिक भविष्यवाणी (12th July, 2018)
• अंकों से जानें, कैसा होगा आपका दिन (12th July, 2018)
• टैरो राशिफल (12th July, 2018)
• राशिफल (12th July, 2018)
• हमारी सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध- पीएम मोदी

केंद्र सरकार को हैं रोहिंग्या शरणार्थी के भारत में बसने के पैटर्न पर संदेह

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि जो रोहिंग्या शरणार्थी आकर भारत में रह रहे हैं, उन्हें देश के अन्य नागरिकों के मुकाबले ज्यादा बुनियादी सुविधाएं नहीं मुहैया कराई जा सकतीं। बता दें कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से दिल्ली और हरियाणा में स्थित शिविरों में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को दी जा रही बुनियादी सुविधाओं पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा था।

इस पर केंद्र सरकार ने सोमवार को कोर्ट से कहा कि रोहिंग्या जिस तरह से म्यांमार से आकर भारत में बस रहे हैं, उसमें एक पैटर्न नजर आ रहा है। अडिशनल सलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई दीपक मिश्रा की तीन जजों वाली बेंच को बताया कि रोहिंग्या शरणार्थी आकर या तो जम्मू में बस रहे हैं या फिर तेलंगाना में।

तुषार मेहता ने कहा, ‘यह पैटर्न क्यों? इसमें भी एक क्रम है। हम रोहिंग्या शरणार्थियों को अपने नागरिकों से ज्यादा बुनियादी सुविधाएं नहीं दे सकते। ऐसा नहीं है कि सरकार उन्हें लेकर पक्षपात कर रही है। वे यहां भारत में पिछले 10 सालों से हैं, लेकिन जिस तरह से अब रोहिंग्या शरणार्थियों द्वारा दायर की जाने वाली याचिकाओं में अचानक ही इजाफा हुआ है, वह चौंकाने वाला है। ये याचिकाएं ऐसे समय में और ज्यादा आनी शुरू हुई हैं जब हम पहले से ही बांग्लादेश से गैरकानूनी तरीके से हो रहे माइग्रेशन से संघर्ष कर रहे हैं।’

loading…

वहीं वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि भारतीय नागरिकों को नौकरी मिल सकती है, मदद के लिए वे आसपास रह रहे अपने लोगों की सहायता ले सकते हैं, लेकिन रोहिंग्या शरणार्थी कहां जाएंगे ? वे किसकी मदद लेंगे? उन्हें नौकरी भी नहीं मिल सकती। वे अपनी रोजीरोटी कमाने के लिए काम भी नहीं कर सकते।

बता दें कि म्यांमार में हिंसा के चलते रोहिंग्या मुसलमानों को अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा, जिसके बाद वे भारत और बांग्लादेश जाकर रहने लगे। बता दें कि रोहिंग्याओं का अपना कोई देश नहीं होता और किसी देश की नागरिकता भी इनके पास नहीं होती। वे म्यांमार रहते हैं, लेकिन वह भी इन्हें गैरकानूनी बांग्लादेशी प्रवासी मानता है। हालांकि बांग्लादेश और भारत सरकार अपने यहां रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस उनके देश भेजने पर विचार कर रही है।

यह पहली बार नहीं है जब रोहिग्याओं को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया हो। कुछ वक्त पहले कुछ दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रोहिंग्याओं को भारत से निकालने की मांग की थी।

loading…

Related Articles