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इस कारण से कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को कम सम्मान दे रही है मोदी सरकार

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो एक हफ्ते के भारत दौरे पर आए हुए हैं। ट्रूडो के साथ उनका पूरा परिवार भी है। ट्रूडो 17 फरवरी की रात भारत पहुंचे, लेकिन पीएम मोदी या कोई बड़ा नेता अबतक उनसे मिलने नहीं पहुंचा है, इसको कनाडा के लोग ट्रूडो के अपमान की तरह देख रहे हैं। कनाडा के कुछ लोगों का मानना है कि भारत जानबूझकर ट्रूडो को नजरअंदाज करके उनका अपमान कर रहा है। बता दें कि ट्रूडो पर आरोप लगते रहे हैं कि वह अपने देश में खालिस्तानियों को समर्थन देते हैं। कनाडा के लोग इसे ही वजह मान रहे हैं।

किन वजहों से लग रहा ऐसा?

कनाडा की एक जानी-मानी लेखक ने सवाल उठाया है कि जब ट्रूडो भारत पहुंचे तो प्रधानमंत्री मोदी उन्हें लेने क्यों नहीं पहुंचे? उन्होंने पीएम मोदी की कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। उन तस्वीरों में पीएम अमेरिका, इजरायल के राष्ट्रपतियों को लेने एयरपोर्ट पर देखे जा सकते हैं। एयरपोर्ट पर सऊदी प्रिंस के साथ भी पीएम की फोटो है। लेखक ने ट्रूडो के मौजूदा दौरे की भी तस्वीर शेयर की हैं। उन्हें लेने पीएम नहीं बल्कि राज्य मंत्री गजेंद्र शेखावत गए थे। लोगों का कहना है कि यह पोस्ट कनाडा में संसदीय सचिव के बराबर होती है। कुछ ने यह भी लिखा कि इससे साफ होता है कि भारत और कनाडा के रिश्ते बेहतर हालातों में नहीं हैं।

ताज महल पर योगी नहीं गए साथ

लोगों को इस बात से भी दिक्कत है कि जब ट्रूडो अपनी पत्नी और तीनों बच्चों के साथ यूपी में ताज महल के दीदार करने पहुंचे तो सीएम योगी आदित्यनाथ उनके साथ नहीं थे। जबकि हाल में जब इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ताज महल गए थे तो योगी उनके साथ थे। ट्रूडो के ताज दौरे पर उनके साथ आगरा के जिला मजिस्ट्रेट और प्रशासन के कुछ लोग शामिल थे।

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क्या बताई जा रही वजह

ट्रूडो को कथित रूप से खालिस्तानियों का समर्थक कहा जाता है। उन्होंने सिख अलगाववादी आंदोलन में शामिल लोगों को अपनी कैबिनेट में मंत्री बनाया था इससे मामला और बिगड़ गया। ट्रूडो की कैबिनेट में फिलहाल चार सिख मंत्री हैं। इसमें हरजीत सज्जन, अमरजीत सोही, नवदीप बैंस, बर्दिश छागर शामिल हैं। सोही ने हाल ही में कहा था कि वह खालिस्तान आंदोलन के न तो खिलाफ हैं और न समर्थन में।

ट्रूडो ने कनाडा में खालसा डे परेड में भी हिस्सा लिया था, जिसमें खालिस्तान समर्थकों के जुटने की रपटें आती रही हैं। भारत नहीं चाहता था कि ट्रूडो इस इवेंट में जाएं, लेकिन ट्रूडो वहां गए थे।

लोग ट्रूडो को राय दे रहे हैं कि वह भारत में खालिस्तानियों से खुद को अलग करके पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से माफी मांग लें। ट्रूडो आनेवाले दिनों में अमृतसर जाएंगे। वे वहां स्वर्ण मंदिर के दर्शन करेंगे। बता दें कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट कर खुद बताया है कि वह जस्टिन ट्रूडो से मुलाकात करेंगे। इससे पहले तक दोनों की मुलाकात पर संशय बना हुआ था।

ट्वीट के मुताबिक, अमरिंदर खुद ट्रूडो का स्वागत करने एयरपोर्ट पर जाएंगे। ट्रूडो के दौरे को लेकर पंजाब सरकार अबतक चुप्पी साधे हुए थी। पंजाब ने मामले की दिशा मोड़ने के लिए केंद्र सरकार के पाले में गेंद धकेल दी थी। उल्लेखनीय है कि यह मामला पिछले कई दिनों से केंद्र तथा राज्य सरकार के बीच विवाद का विषय बना हुआ था। कनाडा के रक्षा मंत्री हरजीत सिंह सज्जन भी इस मामले में रविवार से मध्यस्थता कर रहे थे।

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