ताज़ा खबर

ताज़ा खबर
• सौरव गांगुली की बेटी सना ने नागरिकता कानून के खिलाफ किया पोस्ट, गांगुली ने किया खंडन
• मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे ने निर्भया मामले में दोषी अक्षय ठाकुर द्वारा दायर समीक्षा याचिका पर सुनवाई से खुद को किया अलग
• ममता बनर्जी ने एक अधिसूचना के जरिये NRC से जुड़े कार्यों को पश्चिम बंगाल में रोका
• मऊ में उपद्रवियों ने थाना फूँका, स्थिति नियंत्रण में आयी
• अयोध्या में चार महीनों में आरम्भ होगा एक गगनचुम्बी श्री राम मंदिर का निर्माण-अमित शाह
• पायल रोहतगी की ज़मानत की अर्ज़ी ख़ारिज, रहेंगी 24 दिसंबर तक जेल में
• उद्धव सरकार में दरार, हर बड़ा नेता मंत्री बनाने को बेक़रार
• राहुल गांधी की टिप्पणी के विरोध में “मैं भी सावरकर”
• दिल्ली पुलिस मुख्यालय के सामने बढ़ा विरोध प्रदर्शन, कल दक्षिण पूर्वी दिल्ली के स्कूल बंद
• जूता छुपाई पर दूल्हे ने की मारपीट, दुल्हन ने करवा दिया कैद
• दिल्ली में नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने बसों को आग लगाईं, कारों और बाइकों को तोडा
• भाजपा ने नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की
• प्रशांत किशोर ने कहा नीतीश कुमार भी करेंगे NRC का विरोध, नहीं करेंगे राज्य में लागू
• वीर सावरकर पर टिप्पणी के लिए राहुल गांधी को बिना शर्त मांगनी चाहिए माफ़ी- देवेंद्र फडणवीस
• पीएम मोदी ने सरदार वल्लभ भाई पटेल को उनकी पुण्यतिथि पर किया नमन, योगी ने कहा NRC उनको सच्ची श्रद्धांजलि

सरकार के आयात के बावजूद जनवरी तक नहीं कम हो सकेंगी प्याज की कीमतें, ये है कारण

सरकार प्याज के लिए पश्चिम एशिया और यूरोप में बाजारों को छान रही है, लेकिन इस समय देश को जितना प्याज चाहिए, वह उसका कुछ अंश ही आयात करने में सक्षम है। 22 नवंबर को, सरकार ने मिस्र से 6,090 टन शिपमेंट का अनुबंध किया। इन खेपों के 10 दिसंबर के आसपास पहुंचने की उम्मीद है। 29 नवंबर को, 11,000 टन तुर्की से अनुबंधित किया गया और उसके जनवरी में पहुंचना शुरू होने की उम्मीद है।

बुधवार को एक बयान में कहा गया कि तुर्की से अतिरिक्त 4000 टन इम्पोर्ट करने के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह शिपमेंट जनवरी के मध्य तक आने की उम्मीद है। आयात के लिए अनुबंधित कुल शिपमेंट 21,090 टन है।

राष्ट्रीय बागवानी विकास बोर्ड (NHDB) डेटाबेस से एक साल पहले अक्टूबर-नवंबर के दौरान थोक बाजारों में सब्जी की बिक्री के आंकड़ों की तुलना के अनुसार, मौजूदा कमी, 60,000 मीट्रिक टन से कहीं अधिक है।

प्याज की खुदरा कीमतें बुधवार को अपने शिखर पर पहुंच गईं। एनएचडीबी के मूल्य आंकड़ों के अनुसार, अधिकांश जगह प्याज 200 रुपये प्रति किलोग्राम, विजयवाड़ा के कुछ बाज़ारों में और मुंबई में 140 रुपये किलो था। प्याज कोलकाता में 130 रुपये, चेन्नई में 120 रुपये और बेंगलुरु में 130 रुपये में बिक रहा है। दिल्ली में बुधवार को प्याज 90 रुपये किलो तक बिका।

2009-10 के दौरान तीन दशकों के सबसे गंभीर सूखे के कारण हुई उत्पादन में कमी से कीमतों में इसी तरह की वृद्धि हुई थी। इस वर्ष का संकट मानसून की सुस्त शुरुआत से पहले शुरू हुई आपूर्ति की कमी और मध्य भारतीय राज्यों में अगस्त में भारी बारिश के कारण कटाई में देरी से उत्पन्न हुआ है।

भारत के सबसे बड़े प्याज उत्पादक महाराष्ट्र में बागवानी विभाग के अधिकारी शिरीष जमडे ने कहा, “हमारा आकलन है कि महाराष्ट्र में लगभग 30% फसल नष्ट हो गई है।”

स्टॉक, मूल्य और आयात की निगरानी के लिए गृह मंत्रालय की अध्यक्षता वाले पैनल के अनुसार, ख़राब मौसम ने मुख्य रूप से प्याज की ग्रीष्मकालीन फसल का राष्ट्रीय स्तर पर 26% नुकसान पहुंचाया है। प्याज की खेती महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में केंद्रित है, जो कई क्षेत्रों में बाढ़ के कारण फसलों का नुक्सान देखा गया है।

केंद्र सरकार ने प्याज को आयात करने के लिए राज्य द्वारा संचालित धातु और खनिज व्यापार निगम को अधिकृत किया है, लेकिन अभी तक जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर केवल 1,600 मीट्रिक टन ही आया है। एक अधिकारी ने कहा कि आयातित प्याज, जो कम तीखे किस्म के होते हैं, ने आयातित मूल्य के एक तिहाई पर पेशकश किए जाने के बावजूद कम थोक खरीदार पाए हैं। अगली फसल का उत्पाद जनवरी के बाद से बाजारों में आना शुरू हो जायेगा। तब तक, निश्चित रूप से कीमतें दबाव में रहेंगी।

Related Articles