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चिकित्सा क्षेत्र में सुधार के लिए मोदी सरकार की ओर से लाया गया नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) बिल

चिकित्सा क्षेत्र में सुधार के लिए मोदी सरकार की ओर से लाया गया नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) बिल प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सीट के बदले फीस उगाही पर लगाम लगा सकता है। लोकसभा में पारित होने के बाद यह राज्यसभा में भी पारित हो गया है और शीघ्र ही राष्ट्रपति की अनुशंसा के बाद यह एक्ट क़ानून की शक्ल ले लेगा। हालांकि हालांकि इस बिल के विरोध में आज पूरे देश में डॉक्टर हड़ताल पर रहे। डॉक्टर कई कारणों से इस बिल के विरोध में हैं, जिनमें निम्न आपत्तियां मुख्य हैं:

उनका कहना है कि रेजिडेंट डॉक्टरों को सेवाओं से हटा दिया गया है। संकाय और सलाहकार सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। अगर सरकार हमारी बात नहीं मानती है तो इसे मेडिकल बिरादरी के इतिहास में सबसे काले दिनों में से एक गिना जाएगा।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का यह कहना है यह बिल मेडिकल कॉलेज में महंगाई लाएगा क्योंकि मेडिकल कॉलेजों के प्रबंधन 50 फीसदी से ज्यादा सीटों को अधिक दर पर बेच पाएंगे। आईएमए की सबसे बड़ी आपत्ति इस तथ्य के साथ है कि इस बिल में मौजूदा धारा-32 के तहत करीब 3।5 लाख लोग जिन्होंने चिकित्सा की पढ़ाई नहीं की है उन्हें भी लाइसेंस मिल जाएगा।

आईएमए का कहना है कि इससे लोगों की जान खतरे में पढ़ सकती है। साथ ही आईएमए ने यह भी कहा कि इस बिल में कम्युनिटी हेल्थ प्रोवाइडर शब्द को ठीक से परिभाषित नहीं किया है। जिससे अब नर्स, फार्मासिस्ट और पैरामेडिक्स आधुनिक दवाओं के साथ प्रैक्टिस कर सकेंगे और वह इसके लिए प्रशिक्षित नहीं होते हैं।

आइये देखते हैं नए मेडिकल बिल में क्या बदलाव किए गए हैं:

  1. मेडिकल एडवाजरी काउंसिल :

केन्द्र सरकार एक मेडिकल एडवाइज़री काउंसिल का गठन करेगी जो चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण के बारे में सुझाव देगी।

2- चिकित्सा शिक्षा  की एक ही परीक्षा होगी अर्थात नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET)।

3- इस बिल के अनुसार पढ़ाई पूरी करने के बाद भी मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए टेस्ट देना होगा। और अगर वह इसमें पास होते हैं तभी उन्हें मैडिकल प्रैक्टिस करने के लिए लाइसेंस दिया जाएगा। यही उनके आगे कहीं परीक्षा में बैठने का आधार होगा।

4- सबसे बड़ी बात है कि इस बिल के लागू होते ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया खत्म हो जाएगा। जिससे अधिकारियों कर्मचारियों की सेवाएं भी खत्म हो जाएंगी। हालांकि, उन्हें तीन महीने की सैलरी और भत्ते दिए जाएंगे।

इसके स्थान पर एक नेशनल मेडिकल कमीशन बनाया जाएगा।

इस बिल के अनुसार नेशनल मेडिकल कमीशन ही तय करेगा की निजी मेडिकल संस्थानों की फीस कितनी होगी। हालांकि, वह ऐसा बस 40% सीटों के लिए ही करेगा। 50 फीसदी या उससे ज्यादा सीटों की फीस निजी संस्थान खुद तय कर सकते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण कदम है कि आयुर्वेद-होम्योपैथी के डॉक्टर भी करेंगे एलोपैथिक इलाज :

बिल के तहत एक ब्रिज कोर्स कराया जाएगा। जिसके बाद आयुर्वेद, होम्युपेथी डॉक्टर भी एलोपैथिक इलाद कर पाएंगे। आईएमए इसी का खुलकर विरोध कर रहा है।

इस बिल में नेशनल मेडिकल कमीशन चिकित्सा क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देगा।

 डॉ.सोनाली मिश्रा 

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