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तीन तलाक एक बार फिर से संसद के द्वार

सरकार बन गयी है और सरकार अब काम करने के लिए भी तैयार है, सरकार ने आते ही अपने क़दमों की झलक दे दी थी। और इसी के साथ राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में सरकार की मंशाओं को और स्पष्ट कर दिया है। अपने इरादों और सबका विश्वास के अपने सिद्धांत पर चलते हुए सरकार ने आज लोकसभा में मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक का विधेयक प्रस्तुत कर दिया।

मोदी सरकार न केवल इस टर्म में बल्कि पिछले टर्म में भी इस विधेयक को पारित कराने के लिए हर संभव प्रयास किया था, परन्तु लोकसभा में पारित होकर वह राज्यसभा में अटक गया था। यही कारण है कि इस बार फिर से इस विधेयक पर बहस हो रही है। इस दौरान काफी शोरशराबा और हंगामा भी देखने को मिला। आज संसद में केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस विधेयक को पेश करते हुए कहा कि सरकार सबका विकास और सबके साथ न्याय के लिए प्रतिबद्ध है और यही कारण है कि सरकार इस विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराना चाहती है। उन्होंने कहा कि इससे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा होगी।

पिछली बार की तरह इस बार के विधेयक में भी तीन तलाक देने वाले को तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। उधर, कांग्रेस सहित कई दलों ने इसका विरोध किया। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि इस मुद्दे पर एक ऐसा कानून बनाया जाए जिसके दायरे में सभी समुदायों के लोग आएं। इससे पहले इस विधेयक की जरूरत बताते हुए क़ानून मंत्री ने देश में विभिन्न स्थानों पर दर्ज किए गए तीन तलाक के पांच सौ से अधिक मामलों का हवाला दिया और उन्होंने यह भी कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद सैकड़ों मामले ट्रिपल तलाक के दर्ज हुए  हैं और मुस्लिम महिलाओं को उनके दर्द से छुटकारा नहीं मिला है।

परन्तु ऐसा लगता कि विपक्षी दलों को मुस्लिम पुरुषों से तो मतलब है मगर मुस्लिम महिलाओं से नहीं, यदि ऐसा होता तो वह मुस्लिम महिलाओं के साथ होने वाले अन्याय के साथ न खड़े होकर उनके दर्द को समझती। वह नहीं समझ पा रही कि उसके द्वारा उठाए जा रहे हर कदम पर भारत की जनता की नज़र है। वह अब भी नहीं समझ पा रही है कि वह जनता अब मुद्दों पर बात करना चाहती है, जनता अब वही हिन्दू-मुस्लिम पर बात नहीं करना चाहती। जनता अब यह देख रही है कि कौन उनकी समस्याओं के साथ है और कौन नहीं!

कौन उनकी समस्याओं को हल करना चाहता है और कौन उन पर मात्र परिहास कर चुप रह जाना चाहता है। सबसे दुखद बात तो यह है कि कांग्रेस ने इन चुनाव परिणाम के बाद भी सबक नहीं लिया है। वह अब भी विखंडन की ही राजनीति कर रही है!

अब देखना यह है कि क्या यह विधेयक अब राज्यसभा में पारित हो पाता है या नहीं? या फिर कोंग्रेस एक बार फिर से इस विधेयक में अडंगा डालेगी क्योंकि लोकसभा में यह पारित हो चुका है, अब राज्यसभा की बारी है।

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