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47 मुस्लिम देशों में योग, पाकिस्तान में ॐ के स्थान पर बिस्मिल्ला

कल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन भारत में जोर शोर से किया गया। यह दिन केवल भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरे एशिया के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि योग पूरे एशिया की धरोहर है। परन्तु जब भी भारत में योग की बात की जाती है तो यह देखा जाता है कि मुस्लिम समुदाय के नेता खुद के समुदाय के लिए योग का विरोध करते हैं। बहुत समय नहीं हुआ जब सांसद ओवैसी ने कहा था कि योग इस्लाम के खिलाफ है। वह कहते हैं कि मुसलमान केवल अल्लाह के सामने ही सर झुकाएगा, वह सूर्य नमस्कार क्यों करेगा? वह क्यों किसी के सामने सिर झुकाए? इसी प्रकार कई मुस्लिम संगठन भी योग के खिलाफ कुछ न कुछ फतवा देते रहते हैं, कुल मिलाकर वह ऐसी तस्वीर पेश करते हैं जिससे यह लगता है कि योग मुस्लिमों के खिलाफ है या मुस्लिम योग के खिलाफ हैं। जबकि कल योग दिवस के अवसर पर एक अलग ही तस्वीर देखी गई।

भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में योग का व्यापार खूब फल-फूल रहा है। पाकिस्तान में कई शहरों जैसे इस्लामाबाद, लाहौर और कराची ही नहीं बल्कि गावं देहातों में भी लोगों के बीच योग की लोकप्रियता है। उन्हें योग से खूब फायदे भी हो रहे हैं। मजे की बात यह है कि पाकिस्तान में रहने वाले मुस्लिमों को योग में कुछ भी मुस्लिम विरोधी नहीं लगता। योग उनके लिए उनकी बीमारियों को सही करने के लिए है। पाकिस्तान में योग इतना लोकप्रिय है कि वहां टीवी पर योग से जुड़े कार्यक्रम भी आते हैं।

इसी प्रकार मुस्लिम गणतंत्र ईरान में भी योग बहुत लोकप्रिय है। बीबीसी की माने तो ईरान में योग बहुत लोकप्रिय है और वहां इसे एक खेल के रूप में देखा जाता है।

इसीके साथ अमेरिका में रहने वाली एक मुस्लिम महिला फरीदा हमजा भी दो तीन साल से योग कर रही हैं और योग सिखा रही हैं। बीबीसी के अनुसार उन्हें हालांकि अपने परिवार से सकारात्मक समर्थन नहीं मिला, मगर फिर भी उन्होंने इसे जारी रखने का फैसला किया। वह जब हिन्दू मंदिर में योग सीखने गयी थीं, तो उनके मन में एक बेचैनी थी, उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा है कि वह खुद को हालांकि दोषी मान रही थीं, कि वह किसी धार्मिक कर्मकांड में शामिल हो रही हैं, मगर अल्लाह जानते हैं कि मैं क्या करना चाहती हूँ।

इसी प्रकार पाकिस्तान में भी लोग योग के साथ जुड़ रहे हैं, वह अपनी बीमारियों को ठीक करने के लिए योग कर रहे हैं। वह योग की महत्ता जान रहे हैं। वह योग को भारत के संग संग पाकिस्तान की धरोहर मानते हैं। लाहौर में केवल महिलाओं के लिए योग हेल्थ क्लब चलाने वाली आरिफा का कहना है कि घर बाहर की जिम्मेदारियों के बीच फंसे इंसान को केवल योग ही बाहर निकाल सकता है।

सूर्य नमस्कार को लेकर भी वहां पर हल निकाल लिया गया है। उनका कहना है कि ॐ के स्थान पर बिस्मिल्ला पढ़ लिया जाए।

कहा जा सकता है कि जो मुस्लिम देश हैं वहां पर इस योग को लेकर न ही कोई विरोध है और न ही भ्रान्ति, मगर भारत के मुस्लिम नेता और कथित बुद्धिजीवी जिस तरह से योग को लेकर शोक मनाते नज़र आते हैं, वह अत्यंत निंदनीय है। भारत की धरोहर का सम्मान होना चाहिए और आप लोग नित नए प्रपंच रचकर अपमान कर रहे हैं।

डॉ. सोनाली मिश्रा

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