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कश्मीर के मुद्दे पर दो फाड़ है क्या कांग्रेस ?

आज जब कांग्रेस को सरकार के साथ खड़ा होना था, तब वह एकदम अलग थलग खड़ी है! आज जब कांग्रेस  को इस ऐतिहासिक दिन पर देश के साथ नज़र आना था तब उसने अपना अकेला रहना चुना और बरसों पुरानी की गई भूल को सही करना नहीं चुना।  आज जब उसे एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में आना था साथ, तब उसने राजनीतिक दुराग्रह के चलते इस निर्णय के खिलाफ जाना चुना! आज उसके नेताओं में भी विद्रोह जाग गया है। पार्टी में इसे लेकर एकमत नहीं है। आज कांग्रेस के चीफ व्हिप भुबनेश्वर कलिता ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। वह पार्टी के इस रुख से खुश नहीं है और उनका कहना है कि ‘पार्टी ने मुझसे व्हिप जारी करने के लिए कहा था, लेकिन यह देश के मिजाज के खिलाफ है। पार्टी विनाश के रास्ते पर जा रही है और मैं इसमें उसका भागीदार नहीं बन सकता हूं।’ कांग्रेस के फैसलों के खिलाफ कई लोग उसका साथ छोड़ रहे हैं।

 इस फैसले के प्रति कांग्रेस द्वारा लिए गए स्टैंड पर बहुत ही विवाद हो रहा है और सोनिया गाँधी के नज़दीकी रहे जनार्दन द्विवेदी भी इस फैसले के खिलाफ हैं आज उन्होंने भी जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने का स्वागत किया है। जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि उनके राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहिया हमेशा इस धारा का विरोध करते थे, देर से ही सही लेकिन एक ऐतिहासिक गलती को सुधारा गया है।

 जनार्दन द्विवेदी का यह कथन अधिक आश्चर्यजनक है क्योंकि जनार्दन द्विवेदी को सोनिया गांधी का नज़दीकी माना जाता है। कांग्रेस पार्टी को इस समय सही फैसले लेने वालों की कमी प्रतीत होती है क्योंकि जिस प्रकार गुलाम नबी आज़ाद ने अपने विचार रखे हैं, वह कहीं से भी भारतीय जनमानस के अनुकूल नहीं हैं।

डॉ. सोनाली मिश्रा 

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