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जौहर भारतीय या हिन्दू नहीं था!

पिछले दिनों रानी पद्मावती की कहानी बहुत ही चर्चित रही थी और इसीके साथ चर्चित रहा था जौहर! चर्चा में आया था जौहर! और सारा मुद्दा केवल इस तक सीमित हो गया था कि हिन्दू स्त्रियाँ ही जौहर करती थीं, मुस्लिम नहीं और हिन्दू स्त्रियों और हिन्दू समाज को संकुचित और कुंठित कहकर कुप्रचार किया जाने लगा! जौहर अर्थात स्त्रियों का सामूहिक आत्मदाह! परन्तु यह सामूहिक आत्मदाह क्यों और किसलिए? कहा गया कि यह स्त्रियाँ खुद को शत्रुओं के हाथो से बचाने के लिए करती थीं। कि उनकी देह तक शत्रुओं के हाथ न लगे और वह खुद को राख कर लें!

मगर यह अधूरी जानकारी है, और कहा जाता है कि अधूरा तथ्य सबसे अधिक खतरनाक होता है क्योंकि यह अधूरा तथ्य आपको केवल उतना ही सोचने देता है जितना वह चाहता है कि आप सोचें, वह आपको अपनी उँगलियों पर नचाता है! कहा गया कि जौहर स्त्रियाँ खुद को बचाने के लिए करती थीं, मगर वह जौहर खुद को मुस्लिम आक्रमणकारियों से बचाने के लिए करती थीं। जौहर का आगमन हमारे यहाँ मुस्लिमों के आने के साथ हुआ क्योंकि ऐसा नहीं था कि भारत के राजा परस्पर युद्ध नहीं करते थे, बल्कि वह तो आपस में खूब युद्ध करते थे।  मगर इन युद्धों में किसी ने जौहर किया हो, यह इतिहास में दर्ज नहीं है! इतिहास में अलाउद्दीन खिलजी के समय में किया गया जौहर दर्ज है, बहादुरशाह द्वारा चित्तौड़ पर किए गए आक्रमण के फलस्वरूप किया गया जौहर दर्ज है और इसी के साथ अकबर द्वारा चित्तौड़ पर किए गए आक्रमण के फलस्वरूप किया गया जौहर दर्ज है।

ऐसा क्यों हुआ था कि मुस्लिमों के कारण ही जौहर हुआ, क्योंकि मुस्लिमों के बीच काफिर स्त्रियों की तड़प इतनी थी कि यदि स्त्रियाँ जहर खाकर भी आत्महत्या कर लेती थीं तो भी उनके मृत शरीरों के साथ मुस्लिम सैनिक बलात्कार करते थे। उन्हें अपनी देह जलाने का कोई शौक नहीं था, मगर कबीलाई मुस्लिमों के लिए वह केवल वह काफिर औरतें थीं जिनकी देह का एक एक कोना भोगना उनका अधिकार था। न केवल अधिकार था बल्कि उन्हें नंगी कर देह बाज़ार में बेचना भी उनका अधिकार था।

स्त्रियाँ इस हैवानी प्रवृत्ति से बचने के लिए जौहर करती थीं, अभी हाल ही में आईएसआईएस के अत्याचारों से पीड़ित होकर यजीदी लड़कियों ने भी इसी प्रकार खुद को जलाया था या फिर अपना चेहरा जला दिया था। दुश्मन को हराकर स्त्रियों को बाज़ार में बेचना यह उनकी दरिंदगी थी और इस दरिंदगी के सामने ही हिन्दू स्त्रियों ने खुद को जलाना उचित समझा!

यह कहना कि जौहर भारतीय संस्कृति का हिस्सा था या स्त्रियाँ घरों में रहकर पुरुषों के हारने का इंतज़ार करती थी, बेहद गलत तथ्य हैं क्योंकि इतिहास इस बात का गवाह है कि हिन्दुओं ने मुस्लिमों को अभयदान दिया और मुस्लिमों ने इस क्षमा का गलत इस्तेमाल कर हिन्दू राजाओं को धोखा दिया! यह खुद को बचाने की चरम प्रतिक्रिया थी, जिसके सही या गलत होने पर आज प्रश्न किए जा सकते हैं, मगर सैकड़ों साल पहले दरिंदों की भीड़ के आगे खुद को पेश कर देना, शरीर के बाज़ार में नंगे बिकना, न जाने कितने हाथों से होकर गुजरना और खुद को आग लगाने में से जिसे उचित समझा स्त्रियों ने चुना!

डॉ. सोनाली मिश्रा

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