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बच्चों को बीमारी से लड़ने के लिए एंटीबायोटिक नहीं कीटाणु चाहिए!

शीर्षक पढ़कर चौंक गए होंगे आप! और आप को लग रहा होगा कि कीटाणु तो बीमारी फैलाते हैं तो ऐसे में कीटाणु कैसे बीमारी से लड़ने में बच्चों की मदद करेंगे! मगर सच यही है! कि बच्चों में बीमारी से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता के लिए एंटीबायोटिक के स्थान पर कीटाणु या रोगाणु चाहिए और यह हम नहीं कह रहे हैं ऐसा  वैज्ञानिकों का कहना है। वैसे तो हम पहले के समय में भी देख सकते हैं कि हम और हमसे पहले वाली पीढ़ी खूब मिट्टी में खेलते थे, नहर में तैरते थे और खेतों से सब्जियां ऐसे ही उखाड़ कर खा  लेते थे। न ही उनमें मिट्टी का डर था और न ही उनमें पानी में फैले हुए कीटाणुओं का भय! हकीकत तो यही है कि यही चीज़ें उनके शरीर में रोग प्रतिरोधकता का विकास करती हैं।

कीटाणुओं को बीमारी का आधार मानने की अवधारणा पश्चिम से आई और पश्चिम ने ही सफाई के प्रति सनकी बनाया। हालांकि स्वच्छता हमारे जीवन का मूल आधार है मगर वह स्वच्छता पश्चिम के मानकों के अनुसार नहीं थी। अब पश्चिम में वैज्ञानिकों ने यह बताया है कि सैनीटाइजर, एंटीबैक्टीरियल साबुन और एंटीबायोटिक की डोज़ हमारे बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर डालती है। ऐसा कहना है Let Them Eat Dirt: Saving Our Children from an Over sanitized World की सह लेखिका और माइक्रोबायोलोजिस्ट मेरी-क्लेरी अर्रिता का!

कालगेरी विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफ़ेसर ने अपने सह लेखक ब्रेट फिनले, जो खुद भी एक जाने माने माइक्रोबायोलोजिस्ट हैं, कहा कि हम आज अपने बच्चों को पहले से साफ़ और अधिक स्वच्छ परिवेश में पाल रहे है, उन्होंने कहा कि एक सीमा से अधिक ऐसा करके हम ऐसी स्थितियों का निर्माण कर रहे हैं जो अलर्जी से बढ़कर मोटापे तक चली गयी है।

दस्टार में प्रकाशित साक्षात्कार में मेरी ने कहा कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होने के लिए इन रोगाणुओं का होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हम जब पैदा होते हैं तो हमारे भीतर कोई भी रोगाणु नहीं होते, हमारी प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं होती है। पर जैसे ही रोगाणु हमारे शरीर में आते हैं, हमारी प्रतिरोधक क्षमता कार्य करने लगती है।

उनका कहना है कि यह रोगाणु ही हैं जिनके संपर्क में आने के बाद हमारी प्रतिरोधक प्रणाली प्रशिक्षित होती है, जब तक कोई रोगाणु ही नहीं होंगे प्रतिरोधक क्षमता किससे लड़ना सीखेगी।  उन्होंने यह भी कहा कि जो बच्चा किसानों के परिवेश में पलता और बढ़ता है उसमें अस्थमा का विकास होने की सम्भावना बहुत कम होती है।

https://www।thestar।com/life/2016/10/20/children-need-microbes-not-antibiotics-to-develop-immunity-scientists-say।html?fbclid=IwAR2X041vuiQGLMjovv1bPWxJY7If2Mnt0VBZakTnuSMEHbpEt2L3U4KMMI8

गंदगी और प्राकृतिक वातावरण में अंतर होता है। जानबूझ कर मानव जन्य गंदगियों के मध्य बच्चों को छोड़ना और प्राकृतिक परिवेश में उनके लालन पालन में बहुत अंतर है और स्वाभाविक परिवेश एवं प्रदूषण व संदूषकों को समझकर बच्चों को उचित वातावरण प्रदान करें जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता का विकास हो।

डॉ. सोनाली मिश्रा

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