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सुषमा स्वराज की मृत्यु पर हंसने वाले कौन हैं?

 कल से पूरा देश शोक में डूबा हुआ है। कल का दिन पूरे देश के लिए हर्ष और शोक दोनों के क्षण लेकर आया. जैसे ही देश को पता चला कि जम्मू कश्मीर वाला विधेयक लोकसभा में भी पारित हो गया, वैसे ही देश के उस हिस्से को अपना मानने की भावना ने पूरे देश को उत्साह से लबरेज कर दिया. मगर शाम होते होते देश की धड़कन जैसे थम गयी।

      देश की प्यारी सुष”माँ” अर्थात सुषमा स्वराज, जिन्होनें एक एलीट और समाज से अलग थलग पड़े हुए मंत्रालय को जन जन का मंत्रालय बनाया, उन्हें दिल का दौरा पड़ने की खबर आई और पूरा देश सन्न रह गया. जो कभी सुषमा स्वराज से मिला भी नहीं था वह भी रो रो कर बस सुषमा स्वराज की सलामती की प्रार्थना करने लगा। अधिकतर लोगों की आँखों में आंसू थे क्योंकि कुछ ही क्षण पहले उन्होंने प्रधानमंत्री को ट्वीट करते हुए लिखा था कि वह आज के ही दिन के इंतज़ार में थीं. सच वह कैसी पुण्यात्मा थीं जो भारत के मुकुट को देखकर ही इस धरा को छोड़कर जाना चाह रही थीं. ऐसी पुण्यात्माएं बहुत कम होती हैं जो अंतिम समय तक सक्रिय होकर उस एक निर्णय की प्रतीक्षा में थीं। और ऐसा ही हुआ, जैसे ही संसद ने कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाया वैसे ही उन्होंने अपने प्रयाण का क्षण चुन लिया!

      मगर कुछ ऐसे ही दुर्बुद्धि हैं कि वह सुषमा जैसी स्त्री के महाप्रयाण पर हंस रहे हैं। उन्हें यह पता ही नहीं हैं कि पुण्यात्माओं पर इस उपहास का कोई असर नहीं होता। वह इस धरा पर अपना कार्य करने आती हैं और वह करके निकल जाती हैं, दूसरी यात्रा पर। हिन्दू धर्म में मृत्यु एक देह से दूसरी देह में प्रवेश करने का पड़ाव है। वह एक देह से निकलती है और दूसरी देह में प्रवेश करती है। हो सकता है दूसरे जन्म में कोई इससे भी वृहद कार्य उनकी प्रतीक्षा में हो। सुषमा जैसी आत्माएं तुम जैसों की कुटिल हंसी से प्रभावित नहीं होतीं. वह अपना कर्म करती हैं, तभी पाकिस्तान से आने वाले हर रोगी को वीजा की अनुमति देने के लिए उन्होंने अपने समर्थकों द्वारा दिए गए प्रत्येक अपशब्द को स्वीकार किया. उनके लिए धर्म से बढ़कर मानवता थी, उनके लिए हर किसी के लिए मुस्कान आवश्यक थी, उनके लिए उस माँ की मुस्कान धरोहर थी जिसका बेटा कहीं सुदूर देश में फंस गया है, उनके लिए उस बच्ची की राहत जरूरी थी जिसके माँ बाप कहीं वीजा के कारण फंस गए थे। उनके लिए दूसरे देश की अशांत स्थितियों में फंसे अपने भारतीयों को सुरक्षित निकालना आवश्यक था, इसमें वह भारतीय हिन्दू है, मुस्लिम है या किसी और धर्म का है, उनके लिए मायने नहीं रखता था. वह बस मानवता की दूत बनकर अपने नागरिकों को छुड़ाना जानती थीं, उनके कंधे पर अपनी मातृभूमि का ऋण था, जिसे वह चुका रही थीं। वह चल दी हैं, अपनी दूसरी यात्रा पर! स्वर्ग नरक जैसी कोई भी अवधारणा में सनातन का विश्वास नहीं है, सनातन कर्म पर विश्वास करता है और उसी कर्म के आधार पर सुषमा आज हमारे जनमानस का वह सितारा बन गयी हैं, जिसकी रोशनी से राजनीति हमेशा आलोकित होती रहेगी।

भारत की बेटी को तुम्हारी भद्दी हंसी से कोई फर्क नहीं पड़ता हाँ तुम लोग जरूर नंगे हो गए हो, एकदम नंगे और वह भी पूरे देश के सामने। तुम्हारी विचारधारा केवल नफरत की विचारधारा है, जो मृत व्यक्ति के अंतिम संस्कार से पहले ही अपनी कुंठा निकालने बैठ जाते हो!

डॉ. सोनाली मिश्रा

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