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प्रथम अश्वेत महिला नोबेल विजेता लेखिका टोनी मोर्रिसन का निधन

कहते हैं शब्द जीवित रहते हैं, और शब्दों से ही इंसान जीवित रहता है। शब्द इंसान को हमेशा के लिए जीवित रखते हैं और इंसान अपने द्वारा प्रयोग किए जाने वाले शब्दों को। वह जीने के लिए संबल देते हैं। शब्दों की एक जादूगर आज दुनिया से आँखें मूँद गईं। वह साहित्य में नोबेल पुरस्कार जीतने वाली प्रथम अश्वेत महिला थीं। उनका कहना था कि वह उस भाषा को पुनर्स्थापित करना चाहती हैं जो काले लोग अपनी मूल शक्ति से बोलते हैं। और यह भाषा एक समृद्ध भाषा है मगर सजावटी नहीं।

उनका कहना था कि व्यक्ति को अपने मन का लिखना चाहिए। वह उन्होंने कहा कि वह किसी और का लिहाज करके क्यों लिखें कि कोई सफ़ेद व्यक्ति मेरे लेखन के बारे में क्या सोचेगा। उनका कहना था कि व्यक्ति को स्वतंत्र होकर अपने लिए लिखना चाहिए। उन्हें उनके उपन्यास beloved के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था।

  वह रंगभेद को मानवता का सबसे बड़ा शत्रु मानती थीं। वह कहती थीं कि वह एक गोरे व्यक्ति को एक अश्वेत लड़की के बलात्कार करने के कारण जेल में देखना चाहती हैं। दरअसल रंगभेद के कारण यह अवधारणा बहुत बलवती थी कि श्वेत अश्वेतों से श्रेष्ठ हैं और कोई भी श्वेत व्यक्ति अश्वेत लड़की का बलात्कार नहीं कर सकता।

 उन्होंने इस रंगभेद से अपने लेखन के माध्यम से लड़ाई लड़ी और अपने विचार खुलकर रखे।

आज उनका निधन हुआ है, शब्दों के माध्यम से क्रांति करने वाली लेखिका को प्रणाम!

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