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लंदन में विजय माल्या का विरोध, भारत बदल रहा है

भारत बदल रहा है, जब यह कहा जाता है तो मात्र कथन ही नहीं होता बल्कि यह नागरिकों के आचरण में परिलक्षित हो रहा है। यदि चुनाव की ही बात की जाए तो देखेंगे कि भारत के नागरिकों ने मुफ्त के छ हजार को नकार कर कौशल प्रदान करने वाली सरकार का चयन किया है, अब यह इस सरकार पर निर्भर करता है कि वह जनता की अपेक्षाओं पर कितनी खरी उतरती है। तो जहां एक तरफ भारत के निर्धन तबके ने साल के बहत्तर हज़ार को नकारा है तो वहीं भारत में एक समय स्टार बने रहे और राजाओं से बढ़कर ज़िन्दगी जीने वाले विजय माल्या को भी लेकर एक दिलचस्प खबर आई है जो इस बदलाव को परिलक्षित करती है।

पिछले दिनों भारत और ऑस्ट्रेलिया के मध्य खेले गए क्रिकेट मैच को देखने के लिए शराब किंग और भगोड़ा विजय माल्या दोनों देशों के बीच मैच देखने गया। शायद इतने शानोशौकत का आदी रहा विजय माल्या अब तक भारतीयों को अपनी जागीर समझ रहा है और यही कारण है कि वह आराम से भारतीय आबादी के बीच पहुंचा, मगर उसे यह खबर नहीं रही होगी कि अब जनता जागरूक हो रही है, और वह जान रही है कि जो अपने देश का नहीं वह किसी का भी नहीं! तो जैसे ही विजय माल्या मैच देखने पहुंचा, और लोगों ने उसे पहचाना, वैसे ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और क्रिकेट मैच देखने पहुंचे लोग भारत के इस भगौड़े के पीछे पड़ गए।

विजय माल्या ने कभी भी यह नहीं सोचा होगा कि एक आलीशान ज़िन्दगी जीने वाला और एक समय में देश में अपना सिक्का चलवाने वाला इंसान आज लोगों की नज़र में इतना गिर जाएगा कि लोग उसे अपने साथ बैठाने से हिचकेंगे। विजय माल्या का क्रिकेट प्रेम किसी से छिपा नहीं है और यही कारण है कि वह अधिकतर मैचों में देखा जाता है।

62 वर्षीय विजय माल्या, जो कि किंगफिशर एयरलाइंस का बॉस है, और भारत को जिसकी तलाश लगभग 9000 करोड़ से अधिक की राशि की धोखाधड़ी के मामले में है वह यूके के क्रिकेट के मैदानों में अक्सर देखा जाता है। हालांकि उसे यूके से भारत लाने की प्रक्रिया जारी है। वहां की अदालत में मुकदमा चल रहा है।

लोगों द्वारा इस प्रकार के भगोड़ों को अपने बीच से भगाया जाना यह तो सिद्ध करता है कि भारत बदल रहा है। कल तक जो लोग केवल अपनी रोजी रोटी के विषय में सोचकर कुछ बोलते नहीं थे और एक अजीब से दबाव में चुप रहते थे वह अब खुलकर ऐसे लोगों के सामने आ रहे हैं, जिन्होनें भारत का पैसा मारने का महापाप किया है। उनके भीतर एक आत्मशक्ति का जागरण हो रहा है, जो उन्हें बड़े लोगों से भी टकराने की प्रेरणा दे रही है।

 यदि भारत का युवा वर्ग इसी प्रकार जागृत होता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब भारत में आर्थिक भ्रष्टाचार कम हो जाएगा।  और आर्थिक भ्रष्टाचार के कम होने से भारतीय उसी प्रकार विश्व गुरु बन जाएगा जैसा पहले था।

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