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मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे ने निर्भया मामले में दोषी अक्षय ठाकुर द्वारा दायर समीक्षा याचिका पर सुनवाई से खुद को किया अलग

भारत के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे ने मंगलवार को 16 दिसंबर 2012 के सामूहिक बलात्कार मामले में चौथे दोषी अक्षय ठाकुर द्वारा दायर समीक्षा याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, क्योंकि उन्हें जानकारी मिली कि उनके एक रिश्तेदार ने अतीत में पीड़ित परिवार का प्रतिनिधित्व किया था।

अक्षय ठाकुर की समीक्षा याचिका पर सुनवाई शुरू होने के कुछ ही समय बाद, मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने उल्लेख किया कि उन्होंने एक वकील के नाम को फाइल में देखा है, जिसे देखकर उन्हें लगता है कि क्या उन्हें समीक्षा याचिका पर सुनवाई करनी चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया कि वकील पीड़ित परिवार के लिए पेश हुए थे, न कि सरकार के लिए। लेकिन मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने फैसला किया कि उनके लिए सुनवाई से बाहर रहना सबसे अच्छा है और उन्होंने घोषणा की कि वह एक नई पीठ स्थापित करेंगे। बेंच में जस्टिस आर बनुमथी और अशोक भूषण अन्य सदस्य थे।

अक्षय की ओर से पेश एडवोकेट ए पी सिंह ने यह कहते हुए अपना सबमिशन शुरू कर दिया था कि केस राजनीतिक और मीडिया के दबाव का था और दोषी के साथ घोर अन्याय हुआ है।

पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा और मुकेश सिंह नामक चारों आरोपियों को 23 वर्षीय एक महिला के साथ (निर्भया कांड) सामूहिक बलात्कार और हत्या के लिए फँसी कि सजा दी गयी है, मामले में  पांचवें आरोपी राम सिंह ने मुकदमे के समाप्त होने से पहले जेल में आत्महत्या कर ली और अपराध के समय छठा आरोपी नाबालिग था।

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