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झूठी हैं लिंचिंग की ये घटनाएं, रहें सावधान

एक बार फिर से लिंचिंग का शोर है, असगर वज़ाहर की कहानी लिंचिंग इस सर्कल में घूम रही है जो खुद इकट्ठा होकर गिरोह बद्ध लिंचिंग करता है। उनकी लिंचिंग इतनी स्मार्ट लिंचिंग होती है कि आपको समझ नहीं आएगा कि लिंचिंग भी हो गयी है। और जब यह लोग लिंचिंग का शोर मचाते हैं तो आपको देखना चाहिए कि यह लोग कितनी लिंचिंग कर चुके हैं। आइये कुछ मामलों पर नज़र डालते हैं जब इस गिरोह ने लिंचिंग का शोर मचाया और मामला कुछ और निकला!

जब हम सब ने लिंचिंग जैसे शब्द का नाम सुना नहीं था तब एक घटना हुई और हम सब लिंचिंग लिंचिंग जैसे महान शब्द से परिचित हुए। आइये चलते हैं साल 2016 में जब मुम्बई के बरुन कश्यप ने यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि उसे गौ रक्षकों ने मारा पीटा क्योंकि उन्हें लगा कि बरुन के थैले में गौ मांस है!

अब गौ रक्षक तो गुंडे हैं और गौ मांस तो सबसे पवित्र चीज़ है जिसे खाना अनिवार्य ही किया जाना चाहिए, यदि इन सेक्युलरवादियों का वश चले तो वह गौ मांस को अनिवार्य घोषित कर दें, फिर चाहे आपकी आस्था कुछ भी हो! तो जैसे ही गौ रक्षकों का नाम सामने आया वैसे ही एक तबका उछल कर सामने आ गया और दो दिनों तक लानत मनालत होती रही। और इसमें बरुन को साथ मिला आम आदमी पार्टी की प्रीती मेनन का! मगर रुकिए, सच्चाई कुछ और ही थी, जब इस क्रिएटिव डायरेक्टर की जांच पुलिस द्वारा की गयी तब पता चला कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी और वह हिन्दुओं से नफरत करता था इसलिए उसने यह पूरी कहानी गढ़ी!

बरुन पर मुकदमा दर्ज हुआ, मगर बरुन को जो करना था वह कर चुका था, वह नैरेटिव बना चुका था।

दूसरी घटना है उससे एक वर्ष पहले घटित हुए कलकत्ता में हुए नन के बलात्कार की! जरा सोचिये एक सत्तर वर्षीय नन का सामूहिक बलात्कार होता है और चर्च से 12 लाख रूपए भी चोरी हो जाते हैं। अब यह तो पूरा क़ानून व्यवस्था का मामला था, मगर हिन्दुओं से नफरत करने वाली लिंचिंग मीडिया ने मामले को जाने बिना हिन्दुओं को बदनाम करना शुरू कर दिया। और जब सच्चाई पता चली तो उसमे पाया गया कि इस घटना में पांच बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे। सलीम शेख, खालेद रहमान मिंटू, मिलन सरकार और ओहिदुल शेख को आईपीसी की विभिन्न धाराओं में गिरफ्तार किया गया। जैसे ही इन पाँचों मुसलमानों के नाम सामने आए, इस गिरोह की लिंचिंग भी सामने आ गयी।

वैसे तो कई घटनाए हैं, मगर कुछ और घटनाओं पर नजर डालते हैं, जिनमें मेरठ में एक लॉ कॉलेज में हुई घटना सबसे महत्वपूर्ण है।

मेरठ में एक लॉ की विद्यार्थी उनम खानम ने अपने साथियों पर यह आरोप लगाए कि कॉलेज ट्रिप के दौरान उसके कुछ साथियों ने उसे मुस्लिम होने के कारण छेड़ा और उसने यह भी कहा कि चूंकि वह उस पूरे ग्रुप में अकेली मुस्लिम थी इसलिए उसके साथ ऐसा किया गया। और एक बार फिर से लिंचिंग का शोर मचाने वाले समूहों को मौक़ा मिला और भाजपा और हिन्दुओं को एक बार फिर से कोसा जाने लगा। हालांकि जब कॉलेज से संपर्क किया गया तो पता चला कि यह उनम थी जो भाजपा से अपनी नफरत के चलते अपने साथियों से नफरत करने लगी थी और सबक सिखाना चाहती थी। इसलिए उसने यह कहानी गढ़ी!

कहानियां और भी हैं……….. जैसे दिल्ली का मालवीय नगर कांड जब बच्चों की लड़ाई को साम्प्रदायिक घटनाओं में बदल दिया गया,

लिंचिंग समूह द्वारा बनाए गए जुनैद और अख़लाक़ कांडों के विषय में बात करने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि इनके बारे में सच सामने आ चुका है।

हाल में हुए दो कांडों के विषय में और बात करते है

हाल ही में दिल्ली में एक मदरसा शिक्षक ने आरोप लगाया कि उसे एक कार ने टक्कर मार दी क्योंकि उसने जय श्री राम बोलने से इंकार कर दिया। हालांकि उसके झूठ के गुब्बारे की हवा तब निकल गयी जब एक तो प्रत्यक्षदर्शियों ने ऐसी किसी घटना से इनकार कर दिया और न ही सीसीटीवी में ऐसा कुछ पाया गया।

और सरकार के आने के बाद गुडगाँव में हुआ बरकत अली काण्ड, जिसमें उसने कहा कि उसे कुछ लोगों ने सदर बाज़ार में पीटा और मुसलमान होने के नाते उसकी टोपी भी हटा दी और उससे जय श्री राम का नारा लगाने के लिए मजबूर किया।

हालांकि पुलिस की जांच में यह साबित हुआ कि यह एकदम झूठ है और न ही उसे जय श्री राम का नारा लगाने पर मजबूर किया गया और न ही उसकी टोपी हटाई गयी।

पुलिस का साफ़ कहना था बरकत अली को किसी ने ऐसा कहने के लिए शिक्षा दी गयी उसे उकसाया गया, उसे मामले को साम्प्रदायिक रंग देने के लिए पढ़ाया गया

तो देखा दोस्तों, लिंचिंग की जिन घटनाओं पर गिरोह शोर मचाता है उसकी हकीकत पहचानिये।

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