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कठुआ रेप केस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को दिया निर्देश, पीड़ित परिवार और वकील को दी जाए सुरक्षा

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 साल की मासूम के साथ गैंगरेप और फिर हत्या के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पीड़िता के पिता द्वारा दायर याचिका पर फौरान जवाब देने के आदेश दिए हैं। पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्ष सुनवाई और परिवार की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। इस मामले में सोमवार को सुनवाई की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने पीड़िता के पिता का पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि इस मामले पर जो माहौल पैदा हो गया है। वह निष्पक्ष सुनवाई के अनुकूल नहीं है। माहौल बहुत ज्यादा ध्रुवीकृत हो गया है।

अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने इस मामले में अच्छा काम किया है। पुलिस ने ना केवल आरोपियों को गिरफ्तार किया है, बल्कि साक्ष्यों को भी वैज्ञानिक तरीके से रखा है। पीड़िता की तरफ से दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई जाए और उन्हें अदालत में अपना पक्ष रखने में पूरा सहयोग किया जाए।

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निष्पक्ष सुनवाई की मांग
बता दें कि पीड़ित परिवार ने आशंका जाहिर की थी कि निचली आदालत में इस मामले में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी और उन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा। इस डर से पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अपील में कहा गया है कि इस मामले की सुनवाई राज्य से बाहर की जाए। उनकी अपील पर सोमवार को सुनवाई हुई। उधर, निचली अदालत में पीड़ित परिवार का पक्ष रख रहे वकील दीपिका सिंह राजावत ने भी खुद की जान को खतरा बताया था।

पीड़ित परिवार ने कहा कि इस केस को चंडीगढ़ की कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाए। उन्होंने अंदेशा जताया है कि केस ट्रांसफर हुए बिना इसकी सही से जांच नहीं हो पाएगी। याचिका में कहा गया है कि नेताओं को नाबालिग आरोपी से मिलने से रोका जाए। साथ ही जांच की प्रगति रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा जाए।

दो विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति
जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस मामले में सुनवाई के लिए दो विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की है और दोनों ही सिख हैं। इसे इस मामले में हिन्दू मुस्लिम ध्रुवीकरण को देखते हुए तटस्थता सुनिश्चित करने का प्रयास माना जा रहा है।

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