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कमलनाथ के भांजे और व्यवसायी रतुल पुरी के खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट जारी

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने व्यवसायी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) की मांग की थी, प्रवर्तन निदेशालय को डर था कि वह देश से भाग सकते हैं, और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, और सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।

एजेंसी ने गैर-जमानती वारंट इस आधार पर माँगा कि पुरी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। ईडी ने विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार को बताया कि एक नोटिस के बावजूद जिसमे उन्हें एजेंसी के समक्ष जांच में शामिल होने के लिए कहा गया था, रतुल पुरी अपना पक्ष रखने एजेंसी के सामने नहीं आये।

इससे पहले 6 अगस्त को अदालत ने पुरी की अग्रिम जमानत अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह मामला अग्रिम जमानत के लिए फिट नहीं क्योंकि आरोप “गंभीर प्रकृति” के हैं।

ईडी ने अग्रिम जमानत की अर्जी पर बहस करते हुए पुरी के खिलाफ सबूत होने का दावा किया था। एजेंसी ने कहा था कि इस मामले के एक आरोपी की डायरी – सुषेन मोहन गुप्ता – और आरोपी बने राजीव सक्सेना के पास से बरामद ईमेल,  पुरी अपराध की अपराध में संलिप्तता दर्शाते हैं।

पुरी के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता विजय अग्रवाल ने मामले में पुरी की भूमिका से इनकार किया है। उन्होंने पहले कहा था, ‘अगस्ता वेस्टलैंड में जांच शुरू होने के पांच साल बाद मेरे मुवक्किल का नाम अनावश्यक रूप से इस मामले में घसीटा जा रहा है। यह ईडी के साथ उनके अत्यधिक सहयोग के बावजूद हो रहा है जबकि वह 25 बार जांच में शामिल हुए और हजारों दस्तावेज दिए। ”

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