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निर्भया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के दोषियों की फांसी को रखा बरकरार

राजधानी दिल्ली में 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप मामले में तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी गई। निर्भया मामले के चार आरोपियों में से तीन ने अपनी फांसी की सजा पर पुनर्याचिका दायर की थी निर्भया दिल्ली में चलती बस में गैंग रेप का शिकार हुई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

राजधानी दिल्ली में 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप मामले में तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज होने के साथ ही मामले के चारों दोषियों की फांसी की सजा लगभग तय हो गयी है ।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में फांसी के फंदे से बचने का प्रयास कर रहे तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिकायें खारिज कर दी। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने दोषी मुकेश, पवन गुप्ता और विनय कुमार की याचिकायें खारिज करते हुये कहा-
“पांच मई, 2017 के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिये कोई आधार नहीं है। जिन दोषियों को मौत की सजा सुनाई गयी है वे  निर्णय में साफ तौर पर कोई भी त्रुटि सामने रखने में विफल रहे हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान तीनों दोषियों का पक्ष विस्तार से सुना गया था और अब मौत की सजा बरकरार रखने के निर्णय पर पुनर्विचार के लिये कोई मामला नहीं बनता है।”

मामले के चौथे मुजरिम अक्षय कुमार सिंह ने मौत की सजा के निर्णय पर पुनर्विचार के लिये याचिका दायर नहीं की थी। केंद्र सरकार की ओर से फैसले का स्वागत किया गया है।

निर्भया के माता पिता ने फैसले पर संतो। जताया और मांग की कि दोषियों को जल्द से जल्द फांसी देकर निर्भया और समाज की दूसरी बेटियों और महिलाओं को न्याय दिया जाए। वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी फैसले को एतिहासिक बताया है।

गौरतलब है कि  दिल्ली की 23 साल की पैरामेडिकल की छात्रा का 16 दिसंबर 2012 को गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पांच मई , 2017 को चारों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी । जाहिर है ये फैसला महिला सुरक्षा के लिए एतिहासिक है।

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