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वीएचपी के नए अध्यक्ष ने अभी तक नहीं किये रामलला के दर्शन, अब है राममंदिर बनवाने की जिम्मेदारी

राम मंदिर आंदोलन से देश और विदेश में पहचान बनाने वाले हिंदू संगठन विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष व कार्यकारी अध्यक्ष का संबंध अयोध्या से ना के बराबर रहा है। शनिवार को हुए चुनाव में राघव रेड्डी के स्थान पर नए अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष जस्टिस विष्णु सदाशिव कोकजे और प्रवीण भाई तोगड़िया के स्थान पर कार्यकारी अध्यक्ष बने आलोक कुमार एडवोकेट ने अभी रामलला की चौहद्दी तक नहीं देखी। इतना ही नहीं वीएचपी के मुख्यालय अयोध्या से जुड़े संगठन पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी नए सेनापति से अनजान हैं।

52 वर्षों बाद वीएचपी का नेतृत्व ऐसे हाथों में सौंपा गया है, जिनका राम मंदिर अयोध्या से खासा जुड़ाव ना रहा हो। यह वीएचपी के इतिहास में पहला अवसर ही होगा। अब तक वीएचपी की केंद्रीय टीम में मंदिर आंदोलन में देश व प्रदेश स्तर पर अहम भूमिका निभाने वाले नेता ही स्थान पाते थे। 1990 की कार सेवा व 1992 के ढांचा ध्वंस के हीरो रहे दिवंगत अशोक सिंघल ने लंबे समय तक वीएचपी का नेतृत्व किया।

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लगभग एक दशक से स्वास्थ्य खराब होने की वजह से वह संरक्षक की भूमिका में रहकर राम मंदिर मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखते रहे। उनकी सक्रियता कम होने के बाद प्रवीण भाई तोगड़िया ने नेतृत्व की कमान संभाली और राम मंदिर मुद्दे पर सिंघल के सुर से सुर मिलाते रहे लेकिन वीएचपी के नव गठित केंद्रीय टीम के मुखिया का रामलला के दरबार व अयोध्या ना आना संगठन की कूटनीतिक कमजोरी के रूप में देखा जा रहा है।

वीएचपी सूत्रों की मानें तो संगठन में अध्यक्ष व कार्यकारी अध्यक्ष के नाम सामने आने के बाद मुख्यालय से जुड़े पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी आवाक थे। नाम ना छापने की शर्त पर एक पदाधिकारी ने बताया कि नवनिर्वाचित अध्यक्ष का नाम वह पहली बार सुन रहे हैं। यह कभी अयोध्या नहीं आए।

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