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इस शुक्रवार को गायत्री मंत्र के पाठ से करें देवी को प्रसन्‍न

आज शीतला अष्‍टमी तो है ही साथ ही दिन भी शुक्रवार का पड़ रहा है। यानि आज का दिन देवी की पूजा के सर्वोत्‍तम है। ऐसे में यदि देवी को गायत्री मंत्र के जाप से प्रसन्‍न किया जाये तो आपको कई कष्‍टों से मुक्‍ति मिल सकती है। यदि आप कालसर्प दोष, पितृ दोष और शनि की दशाओं से पीडि़त हैं तो इस मंत्र से सभी दोषों से मुक्ति का उपाय मिल जायेगा।

यदि किसी की जन्म पत्रिका में कालसर्प, पितृदोष एवं राहु-केतु तथा शनि से पीड़ा है उसे शिव ही शांत कर सकते हैं। भगवान शिव सृष्टि के संहारकर्ता हैं। भगवान रुद्र साक्षात महाकाल हैं। सृष्टि के अंत का कार्य इन्हीं के हाथों है। सारे देव, दानव, मानव, किन्नर शिव की आराधना करते हैं। मानव के जीवन में आने वाले कष्ट किसी न किसी पाप ग्रह के कारण होते हैं। भगवान शिव को सरल तरीके से मनाया जा सकता है। शिव को मोहने वाली अर्थात उनको प्रसन्न करने वाली होती हैं माता शक्ति जिनका प्रिय है गायत्री मंत्र तो यदि आप आज गांयत्री मंत्र के साथ शिव को पूजेंगे तो इन सभी दोषों का निदान होना संभव है।

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गायत्री मंत्र इस प्रकार है “ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्”। इस मंत्र का जाप करने का कोई विशेष विधि-विधान नहीं है। शुक्रवार को माता शक्‍ति और शिवजी के सामने घी का दीपक लगाएं। जब भी इस मंत्र का पाठ करें एकाग्रचित्त होकर करें। पितृदोष, एवं कालसर्प दोष वाले व्यक्ति को इसका जाप करना ही चाहिए, लेकिन सामान्य व्यक्ति भी इसे पढ़ें तो भविष्य में कष्ट से मुक्‍त रहेंगे। इस के जाप से मानसिक शांति, यश, समृद्धि, कीर्ति प्राप्त होती है।

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